उनके तो पांवो की नसें भी
मुँह से बोलती होंगी,
उनके हाथों के छाले भी
जीवन के जख्म बयां करते होंगे।।
लोग कहते हैं अक्सर
उन्हें नहाए दिन हो गए
शायद वो किसी के लिए
जदोजहद करते होंगे ।।
उनके चेहरे की झुर्रियां और
बलखाया बदन भी
हकीकत-ए-बयां करता होगा,
शायद उनका मक़सद
जीवन का गुजारा तो नहीं होगा ।।
वो तो करते होंगे कसमकस
अपनी सन्तान के लिए,
बिना किसी स्वार्थ के,
करने को पुरे उनके अरमान
शायद वो माँ बाप ही होंगे।।
हाँ वो माँ बाप ही होंगे।। ।। ।।
लेखक :-बाबुलाल राईका सरनाऊ