सोमवार, 30 मार्च 2015

परिवर्तन

आखिर क्यों फिरता हैं इंसान
भगवान के पीछे ,
शायद उसे नहीं है
विश्वास खुद पर,
या शायद खुद से ज्यादा
विश्वास है भगवान पर,
क्या भगवान दे सकता है
पूर्ण विश्वास सफलता का ?
शायद नहीं ,
फिर किस तरह पूजा जाए
भगवान को ।
नहीं है इस बात का जावाब
इंसान के पास,
और यही हैं जवाब इस बात का ।
इंसान ने कभी नहीं सोचा
क्या चाहता होगा भगवान उससे,
भगवान ने क्या सोचकर
बनाया होगा इंसान ?
शायद नहीं पता
इंसान को भी इस बात का,
और इसी भ्रम में इंसान
दौड़कर जाता हैं वापस
भगवान के पास ,
लेकिन इंसान को दौड़ना होगा
पीछे की बजाय आगे,
सृष्टि के लिए ,
जीवन के लिए,
जीव जगत के लिए,
कुछ नया करने के लिए,
जीवन परिवर्तन मांगता हैं,
परिवर्तन मन का,
आचरण का,
बुद्धि का,
पुरे जीवन का,
केवल परिवर्तन,
परिवर्तन परिवर्तन और परिवर्तन।।

लेखक :- बाबुलाल राईका सरनाऊ


सोमवार, 16 मार्च 2015

बस तू ही तू

जगत रीत के मर्म का नाम हैं तू
मन की आस हैं तू
दिल के पास हैं तू
रंग की रंगत हैं तू
प्रेम की संगत हैं तू
जीवन की जन्नत हैं तू
मेरे दिल की मन्नत हैं तू
तू जीवन की ज़ोत
तू आँखो का नूर,
तू मन का दर्पण
तू ईश् का अर्पण,
मेरे जीवन का सरोकार हैं तू
बस तू ही तू.........
बस तू ही तू..........


लेखक :- बाबुलाल राईका सरनाऊ

अपनत्व

एक प्रयास है कि कुछ अच्छा हो जाए, पर अपनों की अनदेखी से मजबूर हूँ। पल-पल समर्पण चाहता हूँ, पर पास होते हुए क्यो दूर हूँ?😇 पैर ...