आखिर क्यों फिरता हैं इंसान
भगवान के पीछे ,
शायद उसे नहीं है
विश्वास खुद पर,
या शायद खुद से ज्यादा
विश्वास है भगवान पर,
क्या भगवान दे सकता है
पूर्ण विश्वास सफलता का ?
शायद नहीं ,
फिर किस तरह पूजा जाए
भगवान को ।
नहीं है इस बात का जावाब
इंसान के पास,
और यही हैं जवाब इस बात का ।
इंसान ने कभी नहीं सोचा
क्या चाहता होगा भगवान उससे,
भगवान ने क्या सोचकर
बनाया होगा इंसान ?
शायद नहीं पता
इंसान को भी इस बात का,
और इसी भ्रम में इंसान
दौड़कर जाता हैं वापस
भगवान के पास ,
लेकिन इंसान को दौड़ना होगा
पीछे की बजाय आगे,
सृष्टि के लिए ,
जीवन के लिए,
जीव जगत के लिए,
कुछ नया करने के लिए,
जीवन परिवर्तन मांगता हैं,
परिवर्तन मन का,
आचरण का,
बुद्धि का,
पुरे जीवन का,
केवल परिवर्तन,
परिवर्तन परिवर्तन और परिवर्तन।।
लेखक :- बाबुलाल राईका सरनाऊ
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें