सोमवार, 16 मार्च 2015

बस तू ही तू

जगत रीत के मर्म का नाम हैं तू
मन की आस हैं तू
दिल के पास हैं तू
रंग की रंगत हैं तू
प्रेम की संगत हैं तू
जीवन की जन्नत हैं तू
मेरे दिल की मन्नत हैं तू
तू जीवन की ज़ोत
तू आँखो का नूर,
तू मन का दर्पण
तू ईश् का अर्पण,
मेरे जीवन का सरोकार हैं तू
बस तू ही तू.........
बस तू ही तू..........


लेखक :- बाबुलाल राईका सरनाऊ

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